(1) नबी और रसूल का बयान
(2), (अंबिया ए किराम के सवाल -जवाब का बयान )
(1) नबी और रसूल का बयान
नबी और रसूल जिस तरह अल्लाह तआला की जात और सिफ़तों का जानना जरूरी , है उसी तरह यह भी जानना लाज़िम है कि नबी में क्या क्या बातें होनी चाहिये और क्या क्या न होनी चाहिये ताकि आदमी कुन से बचा रहे । रसूल - के माना हैं ख़ुदा के यहाँ से बन्दों के पास ख़ुदा का पैग़ाम लाने वाला ।
नबी
- वह आदमी जिसके पास वही यानी ख़ुदा का पैग़ाम आया लोगों
को खुदा का रास्ता बताने के लिये ख़्वाह यह पैग़ाम नबी के पास फ़रिश्ता लेकर आया हो , खुद नबी को अल्लाह की तरफ़ से इसका इल्म हुआ हो । कई नबी और कई फ़रिश्ते रसूल हैं । नबी सब मर्द थे न कोई जिन नबी हुआ न कोई औरत नबी हुई - एबादत रेयाज़त के ज़रिया से आदमी नबी नहीं होता महज़ अल्लाह तआला की मेहरबानी से होता है इसमें आदमी की कोशिश नहीं चलती अलबत्ता नबी अल्लाह तआला उसी को बनाता है जिसको इस लाएक् पैदा करता है जो नबी होने से पहले ही तमाम बुरी बातों से दूर रहता है और अच्छी बातों से संवर चुकता है नबी में कोई ऐसी बात नहीं होती जिससे लोग नफ़रत करते हों नबी का चाल चलन , शक्ल सूरत , हसब नसब , तौर तरीका , बात चीत सब अच्छे और बे ऐब होते हैं नबी की अक्ल कामिल होती है नबी सब आदमियों से ज्यादा अक्लंमन्द होते हैं बड़े से बड़े हकीम फ़लसफ़ी की अक्ल नबी की अक्ल के लाखवीं हिस्सा तक भी नहीं पहुंचती । जो यह माने कि कोई शख़्स अपनी कोशिश से नबीं हो सकता है वह काफ़िर है और जो यह समझे कि नबी की नुबूवत छीनी जा सकती है वह भी काफ़िर है नबी और फ़रिश्ता मासूम होता है यानी कोई गुनाह उससे नहीं हो सकता नबी और फ़रिश्ता के अलावह किसी एमाम और वली को मासूम मानना गुमराही व बदमज़हबी है - अगरचे एमामों और बड़े - बड़े वलियों से भी गुनाह नहीं होता लेकिन कभी कोई गुनाह हो जाये तो शरअन मोहाल भी नहीं , अल्लाह का पैग़ाम पहुंचाने में नबी से भूल चूक नहीं हो सकती मोहाल है , जो यह कहे कि कुछ अहकाम तक़य्यतन यानी लोगों के डर से या किसी और वजह से नहीं पहुंचाया वह काफ़िर है अम्बिया तमाम मखलूक से अफ़ज़ल हैं यहां तक कि उन फ़रिश्तों से भी अफ़ज़ल हैं जो रसूल हैं । वली कितने ही बड़े मर्तबा वाला हो किसी नबी के बराबर नहीं हो सकता जो किसी गैर नबी को किसी नबी से अफ़ज़ल बताये वह काफ़िर है ।
अक़ीदा
! नबी की ताज़ीम फ़र्ज़ ऐन बल्कि तमाम फ़राएज़ की अस्ल है किसी नबी की अदना तौहीन या तकज़ीब कुफ़ है । सारे नबी अल्लाह
तआला के नज़दीक बड़ी वजाहत व इज्ज़त वाले हैं उनको अल्लाह तआला के नज़दीक मआज़ अल्लाह चूड़े चमार की मिस्ल कहना खुली गुस्ताखी और कलमए कुफ़ है.अम्बिया अलैहिस्सलाम अपनी अपनी क़ब्रों में उसी तरह ज़िन्दा हैं जैसे दुनिया में थे अल्लाह का वादा पूरा होने के लिये एक आन को उन्हें मौत आई फिर ज़िन्दा हो गये उनकी ज़िन्दगी शहीदों की ज़िन्दगी से बहुत बढ़ कर है ।
अक़ीदा !
अल्लाह तआला ने अम्बिया अलेहुमुस्सलाम को ग़ैब की बातें बताई ज़मीन व आसमान का हर हर ज़र्रह हर नबी की नज़र के सामने है । यह इल्मे ग़ैब अल्लाह के दिये से है लेहाज़ा यह इल्म अताई हुआ और अल्लाह तआला का इल्म चूंकि किसी का दिया हुआ नहीं है बल्कि खुद उसे हासिल है लेहाज़ा ज़ाती हुआ अब जबकि अल्लाह तआला के इल्म और रसूल के इल्म का फ़र्क मालूम हो गया तो ज़ाहिर हो गया कि नबी व रसूल के लिये ख़ुदा का दिया हुआ इल्मे ग़ैब मानना शिर्क नहीं बल्कि ईमान है जैसा कि आयतों और हदीसों से साबित है ।
अकीदा -
कोई उम्मती ज़ुहदो तक्वा , ताअत व एबादत में नबी से नहीं बढ़ सकता । अम्बिया सोते जागते हर वक्त यादे एलाही में लगे रहते हैं ।
अक़ीदा
- अम्बिया की तादाद मोक़र्रर करनी ना जाएज है । उनकी पूरी तादाद का सही इल्म अल्लाह ही को है ।
अम्बिया के रुतबे
हज़रते आदम सबसे पहले इन्सान हैं उनसे पहले इन्सान का वजूद न था सब आदमी उन्हीं की औलाद हैं यही सबसे पहले नबी हैं अल्लाह तआला ने इनको बे मां बाप के मिट्टी से पैदा किया अपना खलीफ़ा बनाया । तमाम चीज़ों और उनके नाम का इल्म दिया । फरिश्तों को हुक्म दिया कि आदम को सजदह करो सबने सजदह किया सिवा शैतान के उसने इन्कारकिया और हमेशा के लिये मलऊन व मदूर्द हुआ । हज़रते आदम अलैहिस्सलाम से लेकर हमारे नबी मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे बसल्लम तक बहुत नबी आये । हज़रत नूह , हज़रत इब्राहीम , हज़रत मूसा , हज़रत ईसा और उनके अलावह हज़ारों । यह चारों नबी भी थे और रसूल भी । सबसे आखिरी नबी और रसूल सारी मखलूक से अफज़ल सब के पेशवा हबीबे खुदा हमारे आका हज़रत अहमदे मुज्तबा मोहम्मदे मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम हैं । आपके बाद कोई नबी न हुआ न होगा । जो शख्स हमारे नबी के बाद या आप के ज़माना में किसी और को नबी माने या नुबूवत मिलनी जाएज़ जाने वह काफ़िर है ।
(2), (अंबिया ए किराम के सवाल -जवाब का बयान )
सवाल
- नबी और रसूल किसे कहते हैं ?
जवाब
- नबी वह इन्सान है जिनकी तरफ अल्लाह की वही ( यानी पैग़ाम ) आती हो चाहे वह तबलीग़ ( प्रचार ) पर मामूर हो या न हो । रसूल उस शख़्स को कहते हैं । जिसकी तरफ अल्लाह की वही भी आती हो । और तबलीग का भी हुक्म दिया गया हो ।
सवाल
- सब नबी कितने हैं ?
जवाब
- कम या ज्यादा एक लाख चौबीस हज़ार ।
सवाल
- उनमें रसूल कितने है ?
जवाब
तीन सौ तेरह ( 313 ) या तीन सौ पन्द्रह ( 315 )
सवाल
- कुरान में कितने नबियों के नाम लिखे हैं ?
- जवाब
कुल 26 नाम साफ़ - साफ़ लफ़्ज़ों में लिखें हैं ,
( 1 ) हज़रत आदम ( 2 ) हज़रत इदरीस ( 3 ) हज़रत नूह ( 4 ) हज़रत हूद( 5 ) हज़रत सालेह ( 6 ) हज़रत लूत ( 7 ) हज़रत इब्राहीम ( 8 ) हज़रत इस्माईल ( 9 ) हज़रत इसहाक ( 10 ) हज़रत याकूब ( 11 ) हज़रत यूसुफ़( 12 ) हज़रत जुलकिफ़्ल( 13 ) हज़रत शुऐब ( 14 ) हज़रत मूसा ( 15 ) हज़रत हारुन ( 16 ) हज़रत अलयसअ( 17 ) हज़रत इलयास ( 18 ) हज़रत युनूस ( 19 ) हज़रत उज़ैर ( 20 ) हज़रत दाऊद( 21 ) हज़रत सुलैमान ( 22 ) हज़रत अय्यूब ( 23 ) हज़रत ज़करया ( 24 ) हज़रत यहया ( 25 ) हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम ( 26 ) हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ।
और तीन का बयान इशारे के तरीके पर हुआ है । हज़रत शमवील हज़रत युशअ और खिज़र अलैहेमुस्सलाम ।
सवाल
- इनमें कितने नवी बहुत ज़्यादा मरतवे वाले हुऐ हैं ?
जबाव
पाँच है ,(1) हज़रत नूह , (2) हज़रत इब्राहीम , (3) हज़रत मूसा ,(4) हज़रत ईसा , और इनमें भी सबसे बड़े
(5) हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम
सवाल
- काफ़िरों की तरफ़ सबसे पहले कौनसे रसूल भेजे गऐ ?
जवाब
– हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- क्या तमाम नबियों का एक दीन था ?
जवाब
हाँ लेकिन सब की शरीअत अलग - अलग और आमाल भी जुदा - जुदा थे । वसल्लम ।
- सवाल
क्या अबियाऐ किराम भी किसी की उम्मत हैं ?
जवाब -
हाँ तमाम नबी और रसूल अपने ज़मानों में भी और अब भी हुजूर के उम्मती हैं और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम नबियों के नबी हैं ।
सवाल
- बनी इस्राईल के सबसे पहले और आख़री नबी कौन हैं ?
- जवाब
- बनी इस्राईल के सबसे पहले नबी हज़रत युसूफ़ अलैहिस्सलाम और आख़री नबी हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम . हैं ।
नोटः-
हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम की औलाद को बनी इस्राईल कहते हैं ।
सवाल
अरब क़ौम में कितने नबी पैदा हुऐ ?
जवाब
अरब क़ौम में चार नबी पैदा हुऐ ,( 1 ) हज़रत हूद ( 2 ) हज़रत सालेह ( 3 ) हज़रत शुऐब ( 4 ) हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ।
सवाल
- नबियों में सबसे ज़्यादा लम्बी उमर किसने पाई ?
जवाब
- हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने ।
सवाल
- क्या नबियों से गुनाह होना मुम्किन है ?
जवाब
- नहीं , तमाम नबी मासूम होते हैं उनसे किसी गुनाह का होना शरीअत में मुहाल है । वह हर तरह के छोटे और बड़े गुनाह से होते हैं नबुव्वत के बाद भी और पहले भी ।
सवाल
अचानक मौत किन - किन नबियों की हुई ?
जवाब
– सिर्फ तीन नबियों की हुई, ( 1 ) हज़रत दाऊद अलैहिसलाम, ( 2 ) हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ,( 3 ) हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जिनका नाम पैदा होने से पहले । रख दिया गया ?
- जवाब -
(1) आख़री नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम,( 2 ) हज़रत यहया अलैहिस्सलाम ,( 3 ) हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ,( 4 ) हज़रत इसहाक अलैहिस्सलाम ,( 5 ) हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम
सवाल
- वह कौन से नबी है जिनके दो नाम रखे गऐ ?
जवाब
- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम हमारे नबी का नाम मुहम्मद और अहंमद हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का नाम ईसा और मसीह रखा गया ।
सवाल
- अरब में कितने नबी भेजे गऐ ?
जवाब
पाँच नबी भेजे गऐ,( 1 ) हज़रत हुद अलैहिस्सलाम,( 2 ) हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम ,( 3 ) हज़रत इस्माईल अलैहिस्लाम ,( 4 ) हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम,( 5 ) और हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लमा
सवाल -
किस नबी ने उम्मते मुहम्मदिया में पैदा होने की तमन्ना की थी ?
जवाब
- मूसा अलैहिस्सलाम
सवाल -
कितने नबी ज़िन्दा हैं जिनको अभी मौत नहीं आई है ?
जवाब
चार हैं हज़रत इदरीस और हज़रत ईसा अलैहिमस्सलाम , यह दोनों आसमान पर हैं , हज़रत ख़िज़र , हज़रत इलयास अलैहिमस्सलाम , यह दौनों ज़मी पर हैं ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जो अपनी ज़िन्दगी में क़ब्रे मुबारक में लेट गऐ और वहीं उनकी रुह कब्ज़ कर ली गई ?
जवाब
- हजरत हारुन अलैहिस्सलाम
सवाल
- किन नबियों ने अल्लाह से बिला वास्ते बात - चीत की ?
जवाब -
हजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम
सवाल -
वह कौन से नबी हैं जिनके लिये मकड़ी ने जाला तना और वह दुश्मन की शरारत से महफूज़ रहे ?
जवाब
- एक हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम हैं जिनके लिये ग़ारे सौर के दरवाज़े पर मकड़ी ने जाला तना और दूसरे हजारत दाऊद अलैहिस्सलाम हैं जब उनको तालूत ने कुत्ल करने का इरादा किया तो दाऊद अलैहिस्सलाम एक ग़ार में जा छुपे , जब तालूत को मालूम हुआ तो गार पर तलाश करने गए तो मकड़ी ने जाला तन दिया जिसकी वजह से तलाश में नाकाम रहे ।
सवाल
वह कौनसे दो नबी हैं जो क़यामत के दिन एक कब्र से उठेंगे ?
जवाब
- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- सबसे पहले किस नबी को पैदा किया गया ?
जवाब
– हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को
सवाल
- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत में कितने दिन रहे ?
जवाब
– आखि़रत ( क़यामत ) के आधे दिन के बराबर जिसकी मिक़दार दुनियावी दिनों से पाँच सौ साल है ।
सवाल
– हज़रत आदम अलैहिस्लाम जन्नत से कहाँ उतारे गऐ ?
जवाब
– हज़रत आदम सरान्दीप और हज़रत हव्वा जद्दे में ।
सवाल -
फिर दोनों की मुलाकात कहाँ हुई ?
जवाब
- बकरा ईद के चाँद की नौ तारीख़ को मक़ामे अरफात में हुई ।
सवाल
- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम जन्नत से निकलने के बाद ग़म में कितने साल तक रोते रहे ?
जवाब
- तीन सौ साल तक रोते रहे ।
सवाल
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की कुन्नियत ( उपाधिनाम ) क्या है ?
जवाब
- ज़मीन में “ अबुलबशर " और जन्नत में " अबु मुहम्मद " थी ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जो दुनिया में हज़ार साल तक रहे मगर कभी ज़मीन का पानी न पिया ?
जवाब
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हैं कि पूरी ज़िन्दगी बारिश का पानी पीते रहे ।
सबाल
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की ज़ाहिरी ज़िन्दगी में कौन - कौन से नबी पैदा हुऐ ?
जवाब
हज़रत शीस अलैहिस्सलाम और हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम को हज़रत आदम का कितना ज़माना मिला ?
जवाब
- सौ साल , लेकिन नबी होने का एलान करने का हुक्म हज़रत आदम के इन्तिक़ाल के दो सौ साल बाद हुआ ।
सवाल
वह कौन से नबी हैं जिनके निकाह का खुतबा खुद खुदा ने पढ़ा और खुदा ही ने निकाह पढ़ाया ?
जवाब -
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हैं ।
सवाल
- वह कौन से नबी है जिनके निकाह का दैन महर हमारे नबी पर दुरुद पढ़ना था ?
- जवाब
- हज़रत आदम अलैहिस्सलाम कि आपके निकाह का दैन महर तीन या दस या बीस बार दुरूद शरीफ़ पढ़ना था ।
सवाल
- हज़रत आदम और हज़रत मूसा अलैहिमस्सलाम का मशहूर मुनाज़रा ( बहस ) कहाँ और किस हालत में हुआ ?
जवाब
- इसमें इख्तेलाफ़ हे कुछ के नज़दीक आसमान में रूहों की मुलाकात के वक़्त यह मुनाज़रा हुआ और कुछ के नज़दीक दौनों को आलमे बरज़ख़ ( मौत के बाद की दुनिया ) में ज़िन्दा करके यह मुनाज़रा कराया गया और कुछ के नज़दीक हज़रत आदम को हज़रत मूसा के ज़माने जाहेरी में ज़िन्दा करके यह मुनाज़रा कराया गया।
सवाल
वह कौन से नबी हैं जिनके निकाह का खुतबा हज़रत ने जिब्रील ने पढ़ा और फ़रिशते गवाह बने ?
जवाब
- हज़रत शीश अलैहिस्सलाम ।
सवाल -
" हिबतुल्लाह " किस नबी का लक़ब है ?
जवाब
- हज़रत शीश अलैहिस्सलाम का । वजह यह है कि जब क़ाबील ने हाबील को क़त्ल कर दिया तो हज़रत जिब्रील ने हज़रत आदम को खुरख़बरी दी कि खुदा ने हाबील के बदले में शीश को अता फ़रमाया
सवाल -
हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम का अस्ल नाम क्या है ?
जवाब
- अस्ल नाम “ अख़्नूक " है , इदरीस इसलिये कहते हैं । कि उन्होनें सबसे पहले दर्स ( सबक ) दिया ।
सवाल
- हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम किस आसमान पर हैं ?
जवाब
- चौथे आसमान पर
सवाल-
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम का अस्ल नाम क्या है ?
जवाब
अब्दुलग़फ़्फ़ार या अब्दुल जब्बार नूह के माना हैं । बहुत रोने वाला , चूँकि आप अपने नफ़स बहुत ज़्यादा रोऐ या अपनी उम्मत के गुनाहों पर बहुत रोऐ इसलिये आपका लक़ब नूह पड़ गया ।
सवाल
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ने कितने साल अपनी - कौम को तबलीग़ फरमाई ?
जवाब
- साढ़े नौ सौ साल ( 950 )
सवाल
- शैखुलअंबिया ( नबियों के शेख़ ) किस नबी को कहा जाता है ? -
जवाब
- हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को
सवाल -
हज़रत आदम और हज़रत नूह के बीच कितने साल का फासिला था ?
जवाब
ग्यारह सौ साल का ।
सवाल
- हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को कश्ती बनाना किसने सिखाई ? -
जवाब
अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्राईल अलैहिस्सलाम को भेजा जिन्होंने हज़रत नूह अलैहिस्सलाम को कश्ती बनाना सिखाई ।
सवाल -
हज़रत नूह की कश्ती कितने वक़्त में तैयार हुई ?
जवाब
- दो साल में तैयार हुई , उसकी लम्बाई तीन सौ गज़ , चौड़ाई पचास गज़ और ऊँचाई 30 गज़ थी ।
सवाल-
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती कितने तख़्तों से तैयार हुई ?
जवाब
एक लाख चौबीस हज़ार तख़्तों से और हर तख़्ते की पीठ पर एक एक नबी का नाम लिखा था और सबसे आख़री तख़्ते की पीठ पर “ मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह " लिखा था ।
सवाल
- इस कश्ती में कितने दरजे बनाऐ गऐ थे ?
जवाब
- तीन दरजे बनाऐ गयो थे
( 1 ) सबसे नीचे दरजे में जंगली जानवर और शेर , चीते वगैरा और साँप , बिच्छु ज़मीन के कीड़े मकोड़े वगैरा थे
( 2 ) बीच में चौपाऐ वग़ैरा थे
( 3 ) सबसे ऊपर दरजे में खुद हज़रत नूह अलैहिस्सलाम और आपके साथी थे । और हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का मुबारक जिस्म भी था जो औरतों और मर्दों के बीच में रखा था । खाने पीने का सामान भी इसी में था और परिन्दे भी ऊपर ही के दरजे में थे ।
सवाल
– हज़रत नूह किस तारीख़ में कश्ती पर सवार हुऐ और किस तारीख़ में उतरे ?
जवाब
- दसवीं रजब को सवार हुऐ दसवीं मुहर्रम को ख़ास जुमे के वक़्त जूदी पहाढ़ पर उतरे कुल छः महीने का वक़्त लगा।
सवाल
- उसमें कितने आदमी सवार थे जो तूफान से महफूज़ रहे ?
जवाब
- 80 अस्सी आदमी सवार थे जिनमें दो नबी थे , एक हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का ताबूत और खुद हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- अबुल अबिया ( नबियों के बाप ) किस नबी का लक़ब है ?
जवाब-
हज़रत इब्राहीम ख़लीलुल्लाह का , वजह यह है कि
आठ नबी
हज़रत आदम , हज़रत शीश , हज़रत इदरीस , हज़रत नूह , हज़रत हूद , हज़रत सालेह , हज़रत लूत , हज़रत यूनुस के इलावा बाकी सारे नबी आप ही की नस्ल से हुऐ , आपके दो साहिबज़ादे नबी थे , हज़रत इस्माईल और हज़रत इसहाक़् । ज़्यादा तर नबी हज़रत इसहाक़ की नस्ल से हुऐ और हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की नस्ल में सिर्फ आख़री नबी हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम पैदा हुऐ इसलिये हज़रत ख़लील का लक़ब ( पदवी नाम ) अबुलअंबिया हुआ ।
सवाल
- अबुज़्जैफ़ ( महमान नवाज़ ) किस नबी का लक़ब है ?
जवाब
- हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ।
सवाल
हज़रत इब्राहीम् अलैहिस्सलाम ग़ार में कितने दिन सवाल रहे ? -
जवाब -
पन्द्रह दिन , जिसमें दिन एक महीने के बराबर और महीना साल भर के बराबर था
सवाल
- हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम किस उमर में आग में डाले गऐ ?
जवाब -
सोलह साल की उमर में । -
सवाल -
हज़रत इब्राहीम दुरूद आग में कितने दिन रहे ?
जवाब
- सात दिन ।
सवाल
- हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को जिस आग में डाला गया था उसके लिऐ कितने दिनों तक लकड़ियाँ जमा क गई थीं और कितने दिनों तक दहकाया गया था ?
जवाब
- एक महीने लकड़ियाँ जमा की गई और सात दिन दहकाया गया ।
सवाल
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को आग में डालते वक्त कौनसा लिबास पहनाया गया और किसने पहनाया ?
जवाब
- रेशमी कुमीज थी जिसे हज़रत जिब्राइल अलैहिस्सलमा ने पहनाया था और यह जन्नत से लाई गई थी ।
सवाल –
हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उम्मतेमोहम्मदिया को कब सलाम कहलवाया ?
जवाब
- जब आखरी नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम मैराज शरीफ़ के लिये तशरीफ़ ले जाने लगे और आसमान पर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से मुलाकात हुई तो उस वक़्त उन्होंने आपकी मारेफ़त आपकी उम्मत को सलाम कहलवाया ।
सवाल
– हज़रत इब्राहीम और हज़रत नूह अलैहिमस्सलाम के दरमयान कितने साल का फासिला था ?
जवाब
- एक हज़ार साल का
सवाल
- किस नबी को अबुल अरब ( अरब वाले ) और किस नबी को ( अबुलअजम ( गैर अरब वाले ) कहा जाता है ?
जवाब
– हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को अबुल अरब और हज़रत इसहाक़ अलैहिस्सलाम को अबुल अजम कहा जाता है ।
सवाल
- हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम और हज़रत इसहाक अलैहिस्सलाम में ज़बीहुल्लाह कौन हैं ?
जवाब
- हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलामा हैं
सवाल
- इन दोनों में उमर के एतेबार से बड़े कौन थे ?
जवाब
हज़रत इसमाईल अलैहिस्सलाम , हज़रत इसहाक अलहिस्सलाम से चौदह 14 साल बड़े थे । -
सवाल
हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम का लक़ब क्या था ?
जवाब
- इस्राईल , यह सुरयानी जुबान का लफ़्ज़ है जो " इसरा " और “ ईल " दो लफ़्ज़ों से बना है , इसरा का माना है " " अब्द " और “ ईल " का माना है " अल्लाह " यानी अब्दुल्लाह ।
सवाल
हज़रत याकूब हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम की जुदाई में कितने साल तक रोते रहे ?
जवाब
- तक़रीबन अस्सी साल तक
सवाल -
हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम मिश्र में कितने साल रहे ?
जवाब
- 24 साल
सवाल
- हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के दरमयान कितने साल का फासला था ?
जवाब
- 965 साल का ।
सवाल
- हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम कुऐं में कितने दिन रहे ?
जवाब
- तीन दिन ।
सवाल
- किस उमर में डाले गऐ ?
जवाब
- बारह साल की उमर में
सवाल
- हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम कैद ख़ाने में कितने दिन रहे ?
जवाब
- 12 साल ।
सवाल-
हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम ने मिश्र में कितने साल हुकूमत की ?
जवाब
- नव्वे 90 साल ।
सवाल -
ख़तीबुल अंबीया ( नबीयों को खिताब करने वाले ) किस नबी का लकब है ?
जवाब
- हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम का , चूँकि आप बहुत फसीह व बलीग़ कलाम फरमाया करते थे इसलिये आपका लकब ख़तीबुल अंबिया हुआ ।
सवाल
- किस नबी का सब्र मशहूर है ? -
जवाब-
हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का ।
सवाल-
हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम कितने दिन इम्तेहान व आज़माइश में मुब्तिला रहे ?
जवाब
सात साल या अठारह साल ।
सवाल
- हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का इम्तेहान कैसा था ?
जवाब -
अल्लाह तआला ने पहले आपको हर तरह की नेमतें अता की थीं , सूरत की खूबसूरती भी , ज़्यादा औलाद भी , और माल भी बहुत ज़्यादा । मगर औलाद मकान के गिरने से दबकर ख़त्म हो गई , तमाम जानवर जिनमें हज़ारों ऊँट ओर बकरियाँ थीं बीमार होकर खत्म हो गऐ । इसी तरह तमाम खेतियाँ , और बाग़ात भी तबाह हो गऐ , कुछ भी बाक़ी न रहा फिर आप बीमार पड़े तमाम बदन में आबले पड़ गऐ और आपका जिस्म शरीफ ज़ख़्मों से भर गया , सब लोगों ने आपका साथ छोड़ दिया सिर्फ आपकी बीबी साहिबा आपके साथ रहीं और वही ख़िदमत करती रहीं सालों साल यही हालत रही , फिर अल्लाह तआला
ने आपकी दुआ क़बूल फरमाई और सारी तकलीफें दूर फरमादीं यहाँ तक कि तमाम औलाद को ज़िन्दा फरमा दिया और इतनी ही औलाद और इनायत की यही आपका इम्तेहान था ।
सवाल
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को किसदिन उनकी माँ ने दरया में डाला ?
जवाब –
जुमे के दिन ।
सवाल -
आपकी माँ ने जिस सन्दूक में बन्द करके आपको दरया में डाला था वह सन्दूक कितने दिन पानी में बहकर फिरऔन के महल तक पहुँचा ?
जवाब
- तीन दिन में ।
सवाल
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की जुबान में लुकनत कब पैदा हुई ?
जवाब -
जब आप की उमर तीन साल की थी तो फिरऔरन एक दिन गोद में आपको खिला रहा था कि अचानक आपने उसके चहरे पर थप्पड़ मार दिया , जिससे फिरऔन घबरा गया कि शायद यह वही बच्चा है जो मेरी हुकूमत को बर्बाद कर देगा । फिरऔन ने आपको क़त्ल करना चाहा , लेकिन फिरऔन की बीवी आसिया ने यह कहकर टाल दिया कि अभी बच्चा है । उसमें अकुल व शऊर कहाँ है हज़रत आसिया ने फिरऔन की । तसल्ली के लिये एक तरफ आग का तबक़ रखा और दूसरी तरफ़ हीरे और जवाहरात का तबक़ रखा फिरऔन से कहा देख अगर इस बच्चे में अक़्ल व शऊर होगा तो अपना हाथ हीरे - जवाहरात की तरफ़ बढ़ाऐगा वरना आग की तरफ़ । हज़रत ने अपना हाथ हीरे जवाहरात की तरफ बढ़ाना चाहा लेकिन हज़रत जिब्राईल ने आपका हाथ पकड़कर आग में डाल दिया और आपने उसमें से एक अंगारा उठाकर अपने मुँह में रख लिया जिससे आपकी जुबान जल गई और उसी दिन से आपकी जुबान में लुकनत पैदा हो गई ।
सवाल
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फिरऔन के घर कितने दिन रहे ?
जवाब
- 30 साल ।
सवाल
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम हजरत शुऐब के पास कितने दिन रहे ?
जवाब
- 10 साल ।
सवाल
- हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का मुकाबला कितने जादूगरों से हुआ था ?
जवाब
- अस्सी हज़ार से ।
सवाल
- क्या सब जादूगर आप पर ईमान ले आऐ थे ?
जवाब
- हाँ सब के सब ईमान ले आऐ थे ।
सवाल
अल्लाह तआला ने हज़रत मूसा से तूर पहाड़ पर किस दिन बात - चीत फ़रमाई ?
जवाब
- बक़राईद की नौ तारीख़ को जुमेरात के दिन ।
सवाल
- हज़रत मूसा और हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम के दरमयान कितने साल का फासला था ?
जवाब
चार सौ साल का
सवाल
- हज़रत हारुन हज़रत मूसा से कितने साल बड़े थे ?
जवाब
चार साल ।
सवाल-
हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम ने कितने साल हुकूमत की ?
जवाब
- 40 साल ।
सवाल
– हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम जुबूर मुकद्दस कितनी आवाज़ों में पढ़ा करते थे ?
जवाब
- सत्तर आवाज़ों में पढ़ते थे ।
सवाल
हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ने हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम को अपनी उमर में से कितने साल अता किये थे ?
जवाब -
चालीस साल और कुछ के नज़दीक साठ साल ।
सवाल
अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद अलैस्सिलाम पर किन चीज़ों को उनके बस में कर दिया था ?
जवाब
– पहाड़ों और परिन्दों ( पक्षियों ) को ।
( कुरान सूरऐ सौद )
सवाल
- हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम की कितनी बीबियाँ थीं ?
जवाब
– 100 बीबियाँ थीं ।
सवाल
जब आपका इन्तेक़ाल हुआ तो आपके जनाज़े के साथ कितने आलिम थे ?
जवाब
- चालीस हज़ार । -
सवाल -
हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के दरमयान कितने साल का फ़ासिला था ?
जवाब
- 599 साल का ।
सवाल
अल्लाह तआला ने हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम के बस और कबज़े में किस चीज़ को कर दिया था उसके ज़रीऐ जहाँ चाहते चले जाते थे ?
जवाब
- हवाओं को ।
( कुरान मुकद्दस सूरए स्वाद )
सवाल-
हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कितने साल हुकूमत की ?
जवाब
- 40 साल । -
सवाल
- हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम की उंगूठी में क्या लिखा हुआ था ?
जवाब
- लाइला - ह इल्लल्लाहो मुहम्मदुर्र रसूलुल्लाह लिखा था।
सवाल
- हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम किस उमर में तख़्त पर बैठे ?
जवाब
- 13 साल की उमर में
सवाल
- हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम की कितनी औरतें थीं ?
जवाब
एक हज़ार जिनमें 300 कुंवारियाँ और सात सौ बाँदियाँ थीं । और कुछ के कौल की रोशनी में 300 बाँदियाँ और सात सौ आज़ाद बीबियाँ थीं , एक कौल यह है कि 400 बीबियाँ और 600 बाँदियाँ थीं ।
सवाल
- हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम का लक़ब क्या है ?
जवाब
- जुन्नून और साहिबुल हूत ।
- सवाल
- हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट में कितने दिन रहे ?
जवाब
- इस बारे में मुख़्तलिफ़ रिवायतें ( हवाले ) हैं तीन दिन , या सात दिन , या चौदह दिन या चालीस दिन ।
सवाल
- हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम ने मछली के पेट में
कौनसी दुआ पढ़ी थी जिससे मछली के पेट से बाहर निकल आऐ थे?
जवाब
लाइला - ह इल्ला अन - त सुबहा - न - क इन्नी कुन्तु मिन्ज़्ज़ालिमीन ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जो बचपन में इन्तेक़ाल होने के बाद फिर एक नबी की दुआ से ज़िन्दा हो गऐ थे ?
जवाब
- - वह हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम हें जो बचपन में इन्तेक़ाल फरमा गऐ थे फिर चोदह दिन के बाद हज़रत इलयास अलैहिस्सलाम की दुआ से ज़िन्दा हो गऐ ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जो खुदतो 40 साला जवान मगर उनके बेटे 120 साल के और पोते 90 साल के बूढ़े ?
जवाब
- वह हज़रत उज़ैर अलैहिस्सलम हैं जो इन्तेक़ाल के सौ साल बाद दोबारा जिन्दा किये गये तो जवान थे मगर आपकी औलाद बूढ़ी हो चुकी थी ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं । जिन्होंने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की उम्मत के हाथों से दफ्न होने की तमन्ना की थी ?
जवाब
- वह हज़रत दानियाल अलैहिस्सलाम हैं कि उन्होंने खुदा की बारगाह में दुआ की थी कि उन्हें मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की उम्मत दफ़न करे । रिवायत में है कि जब हज़रत अबू मूसा अशअरी रदियल्लाहु अन्हु ने तस्तर का किला फ़तह किया तो उन्होंने हज़रत दानयाल अलैहिस्सलाम को ताबूत में इस हाल में पाया कि उनके तमाम जिस्म और गर्दन । की सब रगें बराबर चल रही थीं फिर आपने उनको दफन किया । हदीस शरीफ़ में है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया था जो हज़रत दानयाल अलैहिस्सलाम का पता बता दे उसको जन्नत की खुश्ख़बरी देना ।
सवाल
- हज़रत ज़करया अलैहिस्सलाम कब शहीद किये गये ?
जवाब
- हज़रत यहया अलैहिस्सलाम की शहादत के एक दिन बाद।
सवाल
हज़रत ज़करया अलैहिस्सलाम की शहादत किस तरह हुई ?
जवाब -
जब हज़रत यहया अलैहिस्सलाम को ज़िवह किया गया तो उसके जुर्म में कुछ बनी इसराईल अल्लाह की तरफ से ज़मीन में धंसा दिये गऐ उन लोगों ने हज़रत ज़करया को भी शहीद करना चाहा तो आप वहाँ से बचकर एक बाग़ में पहुंच गऐ । इस बाग़ में एक दरख़्त ने आवाज़ दी कि ऐ अल्लाह के नबी मुझ में छुप जाइये , वह दरख़्त फटा और आप उसमें छुप गऐ । फिर दरख़्त आपस में मिल गया । उधर शैतान मरहूद ने मौका ग़नीमत जानकर आपके कपड़े का एक कोना पकड़ कर दरख़्त से बाहर रख दिया था उससे उन ज़ालिमों ने जान लिया कि इसमें छुपे हुऐ हैं । उन्होंने शैतान के कहने पर दरख़्त को आरे से चीर दिया और आप के दो टुकड़े हो गए । फरिशतों ने आपको गुस्ल देकर नमाज़े जनाज़ा अदा की फिर दफ़न कर दिया ।
सवाल
- वह कौनसे नबी हैं जिनको सारी ज़मीन के ऊपर कोई बुरा नहीं कहता ?
जवाब
- वह हज़रत यहया अलैहिस्सलाम हैं कि उन्होंने खुदा की बारगाह में दुआ की थी , ऐ अल्लाह तू मुझे एैसा करदे कि मुझे कोई बुरा न कहे । अल्लाह ने इरशाद फ़रमाया ऐ यहया मैंने अपने लिये तो किया नहीं , कोई मेरा शरीक बनाता है , कोई फ़रिश्तों को मेरी बेटियाँ बताता है कोई कहता हे मेरे लिये बेटा है , लेकिन नबी की दुआ ख़ाली नहीं जाती , यही वजह है कि तमाम नबियों को बुरा कहने वाले मौजूद हैं , लेकिन हज़रत यहया को कोई बुरा नहीं कहता ।
सवाल
– हज़रत यहया अलैहिस्सलाम किस उमर में शहीद हुऐ ?
जवाब
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के आसमान पर उठाऐ । जाने से छः महीने पहले । -
सवाल
हज़रत ईसा और हज़रत यहया अलैहिमस्सलाम के सवाल बीच कौनसा रिश्ता था ?
जवाब
- दौनों में मामू - भान्जे का रिश्ता था ।
सवाल
- हज़रत यहया अलैहिस्सलाम की शहादत किस तरह हुई ?
जवाब
- बादशाह बनी इस्राईल अपनी लड़की या अपने भाई की बेटी पर आशिक था । उसने हज़रत यहया से इससे शादी के मुतअल्लिक पूछा , तो आपने जवाब दिया वह तेरे लिये हराम है । बादशाह चूँकि आपकी बहुत ज्यादा इज़्ज़त व ताज़ीम करता था और आपके हर हुक्म की फरमांबरदारी करता था , इसलिये हुक्म मान लिया । लेकिन यह बात जब लड़की की माँ तक पहुँची तो वह गुस्से में भड़क उठी , वह चाहती थी कि बादशाह की उसकी लड़की से शादी हो जाऐ , बस उसके दिल में उसी दिन से हज़रत यहया की तरफ से दुश्मनी और हसद पैदा हो गया और हज़रत यहया को बीच में से ख़त्म करने की ठान ली । एक दिन उसने अपनी लड़की को बहुत अच्छा लिबास पहनाकर और ज़ेवर से सजाकर बादशाह की ख़िदमत में भेज दिया और उसको बता दिया कि पहले बादशाह को शराब पिलाकर बेहोश कर देना , फिर जब वह तुमसे अपनी ख़्वाहिश पूरी करना चाहे तो तुम इन्कार करना और कहना कि मुझे हज़रत यहया का सर चाहिये , इस बद बख़्त ने ऐसा ही किया । बादशाह ने नशे की हालत में चूर होकर जल्लाद को हुक्म दे दिया कि हज़रत यहया को ज़िबह करके फौरन उनका सर तश्त में रखकर हाज़िर करो , जब ज़िबह करने के बाद सर सामने लाया गया तो सर से आवाज़ आने लगी कि तेरे लिये हराम है , हराम है ।
सवाल -
क्या हज़रत ख़िज़र अलैहिस्सलमा नबी हैं ?
जवाब
- हाँ जमहूर का क़ौल है कि नबी हैं ।
सवाल-
आपका अस्ल नाम क्या है ?
जवाब
बिल्याबिन मलकान और कुन्नियत अबुल अब्बास है ।
सवाल
- फिर आपका लक़ब खिज़र कैसे हुआ ?
जवाब
- आप जहाँ बैठते या नमाज़ पढ़ते हैं वहाँ की ज़मीन खुश्क हो तो हरी - भरी हो जाती इसलिये यह आपका लक़ब हुआ ।
सवाल
- हज़रत ख़िज़र और हज़रत इलयास अलैहिमस्सलाम जब दोनों ज़मीन पर जिन्दा हैं तो क्या खाते - पीते हैं ?
जवाब
- हर साल दौनों हज व उमरा करते हैं , और ख़त्मे हज पर ज़मज़म शरीफ़ के पास मिलते हैं और आबे ज़मज़म पीते कि आइन्दा साल तक के लिए काफी होता है , फिर किसी खा पीने की ज़रुरत नहीं रहती ।
सवाल
- क्या यह दौनों रमज़ान शरीफ़ का रोज़ा भी रखते हैं ?
जवाब
- हाँ दोनों बैतुल मुक़द्दस में रमज़ान शरीफ़ का रोज़ रखते हैं ।
सबाल
वह कौनसे नबी हैं जिन्होंने पैदा होते ही लोगों क सवाल सवालों का जवाब दिया ?
जवाब
- हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ।
सवाल
- आपका लक़ब क्या था ?
जवाब
- कलिमतुल्लाह ( अल्लाह का कलिमा )
सवाल
– हज़रत मूसा और हज़रत ईसा अलैहिमस्सलाम के बीच में कितने नबी तशरीफ़ लाऐ ?
- ( कुरान सुरऐ मरयम )
जवाब
सत्तर हज़ार और कुछ के नज़दीक चार हज़ार ।
सवाल -
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के बीच कितने सालों का फ़ासला था ?
जवाब -
1975 साल का ।
सवाल
- हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ज़िन्दगी में कितने मुर्दों को ज़िन्दा फ़रमाया ?
जवाब -
चार को ज़िन्दा फ़रमाया
( 1 ) आज़र
( 2 ) साम बिन नूह जिनके इन्तेक़ाल किये हुऐ हज़ारों साल गुज़र चुके थे
( 3 ) एक बुढ़िया का लड़का जिसका जनाज़ा आपके सामने से गुज़र रहा था , आपने दुआ फरमाई वह ज़िन्दा होकर लाश उठाने वालों
के कंधों से उतर पड़ा और कपड़े पहन कर घर आ गया काफ़ी दिनों ज़िन्दा रहा उसकी औलाद हुई फिर मौत हुई ।
( 4 )
एक आशिर की लड़की कि शाम को मरी थी फिर अपकी दुआ से ज़िन्दा हो गई ।
सवाल -
हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम किस उमर में आसमान पर उठाऐ गऐ ?
जवाब
- 120 साल की उमर में ।
सवाल
- हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम किस आसमान पर हैं ?
जवाब
– दूसरे आसमान पर
सवाल –
हजुरत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान में क्या खाते - पीते है।
जवाब
– जब अल्लाह तआला ने आपको आसमान पर उठाया तो उठाने से पहले भूक प्यास नींद वगैरा तमाम इन्सानी ज़रुरतों को आपसे ख़त्म कर दिया , यहाँ तक कि आपका हाल शितों की तरह हो गया कि खाने - पीने के मोहताज नहीं रहे , ज़मीन पर दोबारा तशरीफ़ लाने तक इसी तरह रहेगें ।
सवाल
क्या हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम अब भी ज़मीन के ऊपर आते हैं ?
जवाब
- हाँ , मगर छुपकर हज व उमरा भी करते हैं ।
सवाल
- क्या हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम आसमान से नीचे आऐंगे ?
जवाब -
हाँ , कयामत के करीब तशरीफ़ लाऐंगे ।
सवाल
- फिर दुनिया में कितने साल रहेंगे ?
जवाब –
रिवायतों के इख्तिलाफ़ के साथ सात साल ।
चालीस साल , या पैंतालिस साल ।
सवाल
आप शादी भी करेंगे ?
जवाब
हाँ कबील - ए- जुहनिया की एक औरत से शादी फरमाऐंगे और आप की मर्द औलाद भी होगी ।
सवाल
- इन्तिकाल के बाद कहाँ दफ़्न होंगे ?
जवाब
- हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम के पहलू में ।
नोट
दोस्तों इसी तरह के इस्लामिक हदीस पाने के लिए हमारी हिंदी इस्लामिक नॉलेज वेबसाइट को फॉलो करें और हमे कमेंट करके बताइए हदीस आपको कैसी लगी है अगर आपको किसी मसले से रिलेटेड है हदीस चाहिए तो हमें कमेंट करके बताएं और अगर आपको इस सवाल जवाब में कोई डाउट है तो उस सवाल का जवाब कमेंट में बॉक्स में सेंड करें और हम उसका तफ्सील से जवाब देंगे इंशा अल्लाह


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