सहाबा का बयान
सवाल - सहाबी किसे कहते हैं ?
जवाब - उन हज़रात को कहते हैं जिन्हें इस्लाम की हालत में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की मुलाक़ात का शर्फ हासिल हुआ और वह इस्लाम ही पर इन्तेक़ाल कर गऐ जैसे वरक़ह बिन नौफ़ल , या मुलाक़ात का शर्फ नुबूव्वत के ज़माने से पहले हासिल हुआ हो और ज़मानऐ नुबुव्वत से पहले ही हज़रत इब्राहीम की मिल्लत पर इन्तेक़ाल फ़रमा गऐ हों जैसे ज़ैद बिन अमर बिन नुफैल या इस्लाम की हालत में मुलाकात का शर्फ हासिल होने के बाद इस्लाम से फिर गऐ और फिर आपकी मुबारक ज़िन्दगी में ही इस्लाम कुबूल कर लिया जैसे अब्दुल्लाह बिन सअद रदियल्लाहु अन्हु ।
( रदुल मुहतार 1 पेज 10 , बशीरुलकारी पेज 127 ता 132 )
सवाल - कुल सहाबा कितने हैं ?
जवाब – एक लाख चौबीस हज़ार ।
( ज़रक़ानी 8 पेज 288 , अलमलफूज़ 3 पेज 59 )
सवाल - अब तक कितने सहाबा के नाम मालूम हो सके हैं ?
जवाब - जिनके नाम मालूम हो सके हैं सात हज़ार हैं ।
( अल मलफुज 3 पेज 59 )
सवाल - क्या सहाबी होने के लिये बालिग़ होना शर्त है ?
जवाब- नहीं , बल्कि ग़ैर अक़लमन्द बच्चा भी सहाबी हो सकता है अगर उसे नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम से मुलाक़ात का शर्फ हासिल हो , जैसे इमाम हसन व इमाम हुसैन और अबदुल्लाह बिन जुबैर और मो ० बिन अबु बकर रदियल्लाहु
( बशीरुल कारी पेज 127 ) अनहुम सहाबी हैं ।
सवाल - क्या इन्सान की तरह जिन्नात और फ़रिश्तों को भी सहाबी होने का शर्फ हासिल है ?
जवाब – हाँ , यह हज़रात भी सहाबी की तारीफ़ में दाख़िल हैं । और उन्हें भी सहाबी होने का शर्फ हासिल है ।
( ज़रकानी 1 पेज 302 जिल्द 7 पेज 28 , तकमीलुलईमान पेज 9 , बशीरुल कारी पेज 125 )
सवाल - क्या कुछ पैग़म्बर भी सहाबी हैं जिनको देखने वाले ताबेई होंगे ?
जवाब – हाँ , वह नबी जिन्होंने अपनी दुनयवी ज़िन्दगी में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम को ज़मीन पर देखा जैसे हज़रत | ईसा अलैहिस्सलाम और हज़रत इलयास अलैहिस्सलाम कि उन्होंने बैतुल मुक़द्दस में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम को देखा था वह सहाबी हैं , इसी तरह हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम सहाबी हैं उनको देखने वाले ताबेई होंगे । ( सावी 3 पेज 287 , अलमलफूज़ 4 पेज 47 )
सवाल - तमाम सहाबा में सबसे अफ़ज़ल कौन हैं ?
जवाब - हज़रत अबुबकर सिद्दीक , फिर हज़रत उमर फारुक , फिर उसमाने ग़नी , फिर हज़रत अली मुश्किल कुशा रदियल्लाहु अनहुम ।
( मवाहिब लदुन्निया 1 पेज 414 )
सवाल - ख़िलाफ़ते राशिदह किसे कहते हैं और उनके मिसदाक़ ( मुसातहिक ) कौन - कौन हुऐ ?
जवाब – ख़िलाफ़ते राशिदा उस ख़िलाफ़त को कहते हैं जो नुबुव्वत के तरीक़े पर हो । जैसे चारों ख़लीफा और इमाम हसन मुजतबा और अमर बिन अब्दुल अज़ीज़ की ख़िलाफ़त और आख़ीर ज़माने में हज़रत इमाम महदी रदियल्लाहु अन्हुम ऐसी। ख़िलाफ़त कायम फ़रमाऐंगे । ( अलमलफूज़ 3 पेज 59 )
सवाल - ख़िलाफ़ते राशिदा कितने सालों तक रही ?
जवाब- पहले तीस साल फिर बाद में हज़रत अमर इब्ने अब्दुल अज़ीज़ की ख़िलाफ़ते राशिदह ढाई साल तक रही ।
( शरह फ़िक़हे अकबर लिअलीक़ारी पेज 68 , निबरास पेज 504 )
जवाब - हज़रत अबु बकर की ख़िलाफ़त ढाई साल , हज़रत उमर फ़ारुक की साढ़े दस साल , हज़रत उसमाने ग़नी की बारह साल , हज़रत अली की खिलाफ़त चार साल नौ महीने रही फिर हज़रत इमाम हसन छः महीने ख़लीफ़ा रहे ।
( शरह फ़िकहे अकबर लिअली क़ारी पेज 68 , निबरास 504 )
सवाल – खुलफाऐ राशेदीन में से किन - किन की उमर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की उमर शरीफ के बराबर हुई ?
जवाब - हज़रत अबु बकर सिद्दीक , हज़रत उमर फारूक और हज़रत अली मुर्तज़ा रदियल्लाहु अन्हुम की हुई ।
( मसनद इमाम आज़म पेज 113 , अलमलफूज़ 1 पेज 9 )
सवाल - वह दस सहाबी कौन हैं जिनके बारे में नबी - ए - करीम सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने जन्नती होने की खुशख़बरी दी ?
जवाब - हज़रत अबुबक सिद्दीक़ हज़रत उमर फारुक , हज़रत उसमान ग़नी , हज़रत अली , हज़रत जुबैर , हज़रत तलहा , हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ , हज़रत अबु उबैदा , बिन अलजरीह , हज़रत सईद बिन ज़ैद और हज़रत सअद बिन वक़्क़ास रदियल्लाहु अन्हुम । ( इब्ने माजा 1 पेज 61 , शरह फ़िक्हे अकबर लिअली कारी पेज 119 )
सवाल- क्या जन्नती होने की खुरख़बरी उन्हीं के साथ ख़ास हे या उनके इलावा भी किसी के लिये जन्नती होने की बशारत है ?
जवाब - हाँ उनके इलावा भी कुछ हज़रात के लिये जन्नती होने की बशारत है , जैसे हज़रत फतिमा जुहरा , हज़रत इमाम हसन । व हुसैन , हज़रत ख़दीजतुल कुबरा , हज़रत आयशा सिद्दीका , हज़रत हमज़ा , हज़रत अब्बास , हज़रत सलमान फारसी , हज़रत सुहैब रुमी , हज़रत , अम्मार बिन यासर , हज़रत जअफ़र तय्यार | तमाम एहले बदर व एहले हुदैबिया , और एहले बैते रिज़वान ।
( तकमीलुल ईमान पेज 65 , शरह फ़िकहे अकबर बहरुलउलूम पेज 52 )
सवाल- वह कौनसे मुक़द्दस सहाबी हैं जिनके हाथ पर अररऐ मुबरशरह में से पाँच सहाबी ईमान लाऐ ?
जवाब- हज़रत अबु बक़ सिद्दीक हैं जिनके हाथ पर हज़रत उसमान हज़रत तलहा , हज़रत जुबैर , हज़रत सअद बिन वक्कुस हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ ईमान लाऐ ।
( सीरतहलबी 1 पेज 314 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनको अल्लाह तआला अपना सलाम कहलवाया ?
जवाब - हज़रत अबु बक़ सिद्दीक ( तफ़सीर अज़ीज़ी पारा 30 तीस पेज 208 )
सवाल - हज़रत अबु बक़ सिद्दीक़ की पैदाइश किस सन् में हुई ?
जवाब - आम्मुल फ़ील ( हाथी वाले वाकिए ) के तीन साल
( तारीखुल खुलफ़ा पेज 25 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं । जिनसे मैदाने महशर में कोई हिसाब नहीं लिया जाऐगा ?
जवाब - हज़रत अबु बक़ सिद्दीक । ( नूरुल अबसार पेज 54 )
सवाल वह कौन से सहाबी हैं जो अपने मां-बाप की जिंदगी में खलीफा बने ?
जवाब- हज़रत अबु बक़ सिद्दीक । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 57 )
सवाल- वह कौनसे सहाबी हैं जो इस उम्मत पर सबसे ज़्यादा महरबान हैं ?
जवाब हज़रत अबु बक सिद्दीक । ( अश्शरफुल मोबिद पेज 114 ) सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिन्होंने हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की ज़िन्दगी में लोगों को नमाज़े पढ़ाई ? जवाब हज़रत अबु बक सिद्दीक हैं कि तीन दिन में सत्तरह वक़्त की नमाजें पढ़ाई । ( मदरिजुन्नुबुव्वत 2 पेज 571 , नुज़हतुल कारी 3 पेज 143 )
सवाल - वह कौन सहाबी हैं जिनके पीछे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने नमाज़े पढ़ीं ?
जवाब- हज़रत अबु बक सिद्दीक रदियल्लाहु अनहु हैं कि मरज़े वफ़ात में नबी - ए - करीम सल्लल्लाहु अलेहे वसल्लम ने उनके पीछे तीन वक्त की नमाज़े पढ़ीं और सफ़र की हालत में हज़रत अब्दुर्रहमान बिन औफ़ के पीछे फजर की नमाज़ पढ़ी ।
( मवाहिब लदुन्निया 1 पेज 73 )
सवाल - आपका इन्तेकाल किस सन् में हुआ ?
जवाब - सन् 13 हिजरी में । ( तारीखुल खुलफा पेज 60 )
सवाल - आपकी नमाज़े जनाज़ा किसने पढ़ाई ?
जवाब- हज़रत उमर ने । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 62 )
सवाल - वह कौन सहाबी हैं जो दीन के मामले में सबसे ज़्यादा सख्त हैं ?
जवाब- हज़रत उमर फारुक - ( अश्शरफुलमौबिद पेज 114 )
सवाल- वह कौनसे सहाबी हैं जिनके मुसलमान होने पर आसमान के फ़रिश्तों में खुशी की लहर दौड़ गई ?
जवाब- हज़रत उमर फारुक । ( ज़रकानी 1 पेज 277 )
सवाल - जिस वक्त हज़रत उमर फारुक ने इस्लाम कुबूल किया तो मुसलमानों की तादाद कितनी पहुँच गई थी ?
जवाब - उस वक़्त 39 मर्द और 21 ओरतें इस्लाम ला चुकी थीं , हज़रत उमर से चालीस मर्दों की तादाद पूरी हुई ।
( ज़रकानी 1 पेज 273 , तारीखुल खुलफा पेज 78 )
सवाल - आपकी पैदाइश किस सन् में हुई ?
जवाब - आम्मुल फील के 13 साल बाद । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 78 )
सवाल - आपको किसने शहीद किया ?
जवाब अबु लुअलु मजूसी ने । ( तारीखुल खुलफा पेज 95 )
सवाल- आपकी नमाज़े जनाज़ा किसने पढ़ाई ?
जवाब - हज़रत सुहैब रुमी ने। ( तारीखुल खुलफा पेज 97 )
सवाल- आपकी उमर शरीफ़ कितनी हुई ?
जवाब - 63 साल । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 97 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनकी सख़ावत ( दानशीलता ) मशहूर है ।
जवाब- हज़रत उसमाने ग़नी । ( अश्शर फुलमौबिद पेज 114 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनकी शफाअत से ऐसे सत्तर हज़ार आदमी बिना हिसाब किताब के जन्नत में जाऐंगे जो जहन्नम के मुसतहिक हो चुके होंगे ?
जवाब - हज़रत उसमाने ग़नी रदियल्लाहु अन्हु । ( ज़रकानी 3 पेज 315 )
सवाल - आपकी पैदाइश किस सन् में हुई ?
जवाब- आम्मुल फ़ील के छः साल बाद । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 105 )
सवाल- आपकी उमर कितनी हुई ?
जवाब - बयासी साल । ( तारीखुल खुलफा पेज 114 )
सवाल- आपको किसने शहीद किया ?
जवाब - मिश्र के एक आदमी ने जिसका नाम हम्मार था या असवद अलतजीबी ने । ( तारीखुल खुलफा पेज 114 ) तब सेरतुददेराया 43
सवाल- आपकी नमाज़े जनाज़ा किसने पढ़ाई ?
जवाब - हज़रत जुबैर ने । ( तारीखुल ख़लफा पेज 115 )
सवाल - आपको कहाँ दफ़न किया गया ?
जवाब - जन्नतुल बक़ी शरीफ़ में । ( तारीखुल खुलफ़ा पेज 114 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं , जिनकी तरफ देखना इबादत है ?
जवाब- हज़रत अली मुरतज़ा । ( अश्शरफुल मौबिद पेज 114 )
सवाल - वह कौन से सहाबी हैं जो सबसे बेहतर फैसला करने वाले हैं ?
जवाब - हज़रत अली मुश्किलकुशा ( अरशरफुल मौबिद पेज 114 )
सवाल - आपका लक़ब करीर किसने रखा और क्यों रखा ?
जवाब - आपका यह लक़ब हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने रखा , क्योंकि करीर के माना बार - बार हमला करने वाले के हैं और हज़रत अली भी दुश्मन पर बार - बार हमला करने वाले थे , इसलिये आपका यह लक़ब रखा गया । ( ग़यासुल्लुगात पेज 358 )
सवाल-आपकी पेदाइश कब और कहाँ हुई ?
जवाब आपकी पैदाइश आम्मुल फील के तीस साल बाद ख़ानऐ काबा में हुई । ( सीरत हल्बी 1 पेज 165 )
सवाल आपको किसने शहीद किया ?
जवाब - अब्दुर्रहमान बिन मुलजम ने । ( तारीखुल खुलफापेज 123
सवाल - नमाज़े जनाज़ा किसने पढ़ाई ?
जवाब - हज़रत हसन ने पढ़ाई और कूफ़े के दारुल इमारत में दफ़न किये गऐ । ( तारीखुल ख़लफा पेज 123 )
सवाल - आपकी उमर मुबारक कितनी हुई ?
जवाब - 63 साल । ( मसनद इमाम आज़म पेज 113 )
सवाल- वह कौन - कौन से सहाबी हैं जिनके लिये हुजूर ने अपने माँ - बाप को जमा फ़रमाया अलैहे वसल्लम यानी फिदा - क अबी व उम्मी यानी मेरे माँ - बाप आप पर कुरबान फ़रमाया ?
जवाब – हज़रत जुबैर बिन अव्वाम , हज़रत सअद बिन वक्कास , और हज़रत तलहा । ( इब्ने माजा 1 पेज 59 ता 60 नुज़हतुल क़ारी 1 पेज 282 )
सवाल- वह कौनसे सहाबी हैं जिनकी शक्ल में हज़रत जिब्राईल तशरीफ़ लाते थे ?
जवाब - हज़रत दहय्या कलबी । ( मदारिजुन्नुबुव्वत 2 पेज 44 )
सवाल – वह कौनसे सहाबी हैं । जिनको हज़रत जिब्राईल ने सलाम कहा ?
जवाब - हज़रत तलहा रदियल्लाहु अन्हु । ( ज़रकानी 3 पेज 318 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनकी तनहा गवाही दो मर्दों के बराबर है ?
जवाब हज़रत खुजैमा । ( बुख़ारी शरीफ़ 1 पेज 394 )
सवाल- वह कौनसे मुक़द्दस सहाबी हैं जिनको हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने अपना बेटा बना लिया था ?
जवाब हज़रत ज़ैद बिन हारिसह । ( जलालैन शरीफ़ पेज 355 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं , जिन को क़यामत के दिन उलमा का इमाम बनाया जाऐगा ?
जवाब - हज़रत मआज़ बिन जबल हैं कि क़यामत के दिन सब आलिमों के आगे होंगे । ( कन्जुल उम्माल 7 पेज 87 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनके जनाज़े पर सत्तर हज़ार फ़रिश्ते हाज़िर हुऐ ?
जवाब हज़रत सअद इब्ने मआज़ । ( ज़रकानी 2 पेज 139 )
सवाल - वह कौनसे सहाबी हैं जिनकी उमर सबसे ज़्यादा लम्बी हुई ?
जवाब- हज़रत सलमान , फ़ारसी हैं कि आपकी उमर ढाई सौ साल हुई और बाज़ ने साढ़े तीन सौ साल बयान की । हज़रत शाह अब्दुल हक़ मुहद्दिस दहलवी फ़रमाते हैं कि उन्होंने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का ज़माना भी पाया है । ( मिश्कात असमाउर्रिजाल पेज 597 )
सवाल - वह कौनसे सहावी हैं जिनका इन्तिकाल सबसे बाद में हुआ ?
जवाब- हज़रत अबु तुफैल आमिर विन वासिला ।
( मिशक़ात असमाउर्रिजाल पेज 601 ) अल जवांहरूल मुजिया 2 पेज 426
सवाल - वह कौनसे ताबेई हैं जिनके हाथ पर सहाबी मुसलमान हुऐ ?
जवाब शहंशाहे हबशा नजाशी हैं जिनके हाथ पर अमर बिन आसी सहाबी मुसलमान हुऐ । ( ज़रक़ानी 3 पेज 302 )
सवाल - वह कौनसी सहेबिया हैं जिनको अल्लाह ने अपना सलाम भिजवाया ?
जवाब - हज़रत ख़दीजतुल कुवरा । ( शरह सफ़रुस्सआदह पेज 411 )
सवाल - वह कौनसी सहीबिया हैं जिनको हज़रत जिब्राईल ने सलाम कहलवाया ?
जवाब- हज़रत आयशा सिद्दीक़ा । ( शरह सफरूससआदह पेज 411 )
सवाल वह कौनसी सहाबिया हैं जिनकी क़ब्र में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम कुछ देर के लिये लेट गऐ फिर उस सहाविया को उसमें दफ़्न किया गया ?
जवाब- फ़ातिमा बिन्त असद वालदह ए हज़रत अलीकर्रमल्लाहु वजहहु हैं । ( जज़बुल कुलूब पेज 171 )
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