किस पानी से वज़ू और गुस्ल जाएज़
और किससे नहीं है
मसला - दस हाथ लम्बा दस हाथ चौड़ा पानी जिस हौज़ या तालाब में हो वह ' दह दर दह ' या बड़ा हौज़ कहलाता है । यूंही अगर बीस हा लम्बा और पांच हाथ चौड़ा हो या पचीस हाथ लम्बा और चार हाथ चौड़ हो ग़रज़ कुल लम्बाई चौड़ाई का हासिले ज़रब सौ हो और अगर गोल हो तो - मोलाई तक़रीबन साढ़े पैंतीस हाथ हो और गहराई इतनी काफी है कि इतनी सतह में कहीं से ज़मीन खुली न हो ऐसे हौज़ का पानी बहते पानी के हुक्म में है । नजासत पड़ने से नापाक न होगा जब तक नजासत की वजह से रंग या बड़े बू या मज़ा न बदल जाये ।
मसला - बड़े हौज़ में ऐसी नजासत पड़ी जो दिखाई न दे जैसे शराब पेशाब तो इसमें हर तरफ़ से वज़ू कर सकते हैं और अगर देखने में आती हो जैसे पाखाना या मरा हुआ जानवर तो जिस तरफ़ वह नज़ासत है उस तरफ़ वज़ू न करना बेहतर है दूसरी तरफ से वज़ू करे ।
मसला - बड़े हौज़ में एक साथ बहुत से लोग वज़ू कर सकते हैं अगरचे वज़ू का पानी इसमें गिरता हो लेकिन नाक , थूक , खेखार , कुल्ली इसमें न डालना चाहिये कि नज़ाफ़त के खेलाफ़ है । - मसला - जो पानी वज़ू या गुस्ल करने में बदन से गिरा वह पाक है । मगर इससे वज़ू और गुस्ल जायज़ नहीं ।
मसला - अगर बे वज़ू शख्स का हाथ या उंगली या पूरा या नासुन या बदन का कोई टुकड़ा जो वज़ू में धोया जाता है बक्सद या बिला कसद ' दह दर दह ' से कम पानी में बे धोये हुये पड़ जाये तो वह पानी वज़ू और गुस्ल के लाएक न रहा इसी तरह जिस शख्स पर नहाना फ़र्ज़ है उसके जिस्म
का कोई हिस्सा विला धुला हुआ पानी से छू जाये तो वह पानी वज़ू और के काम का न रहा अगर धुला हुआ हाथ या बदन का कोई हिस्सा गुस्ल पड़ जाये तो हर्ज नहीं ।
मसला - पानी में हाथ पड़ गया या और किसी तरह मुस्तामल हो गया अब यह चाहे कि यहं काम का हो जाये तो अच्छा पानी इससे ज्यादा इसमें मिला दें और इसका यह तरीका भी है कि उसमें एक तरफ से पानी ढालें कि दूसरी तरफ़ से बह जाये तो सब पानी काम का हो जायेगा ।
मसला - छोटे छोटे ‘ गढ़ों ' में पानी है और उसमें नजासत पड़ना मालूम नहीं तो इससे वज़ू जाएज़ है ।
मसला - काफ़िर की ख़बर कि यह पानी पाक या नापाक है दोनो सूरतों में पानी पाक रहेगा कि यह इसकी असली हालत है ।
मसला - किसी दरख्त या फ़ल के निचोड़े हुये पानी से वज़ू जाएज़ नहीं जैसे केले या तरबूज़ का पानी और गन्ने का रस ।
मसला - जिस पानी में थोड़ी सी कोई पाक चीज़ मिल गई जैसे गुलाब , केवड़ा , जाफ़रान , मिट्टी , बालू तो इससे वज़ू व गुस्ल जाएज़ है ।
मसला- कोई रंग या ज़ाफ़रान पानी में इतना पड़ गया कि कपड़ा रंगने के काबिल हो गया तो उससे वज़ू व गुस्ल जाएज़ नहीं ।
मसला - पानी में इतना दूध पड़ गया कि दूध के ऐसा रंग हो गया तो वज़ू व गुस्ल जाएज़ नहीं ।
कुएँ के पानी का बयान
मसला - कुएँ में किसी आदमी या जानवर का पेशाब या बहता हुआ खून या ताड़ी या सेंघी या किसी क़िस्म की शराब का क़तरा या नापाक लकड़ी या नजिस कपड़ा या और कोई नापाक चीज़ गिरी तो उसका कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - जिन चौपायों का गोश्त नहीं खाया जाता उनके पाखाना पेशाव गिरने से कुओं नापाक हो जायेगा । यूंही मुर्गी और बत की बीट से नापाक हो जायेगा और इन सब सूरतों में कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - जिस कुएं का पानी नापाक हो गया उसका एक कतरा भी अगर पाक कुएं में पड़ जाये तो यह भी नापाक हो जायेगा । जो हुक्म उसका था वही इसका हो गया । यूंही डोल , रस्सी , घड़ा जिनमें नापाक कुएं का पानी लगा था पाक कुएं में पड़े वह भी नापाक हो गया ।
मसला - कुएं में आदमी , बकरी य कुत्ता या और कोई दमवी जानवर उनके बराबर या उनसे बड़ा गिर कर मर जाये तो कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - मुर्गा , मुर्गी , बिल्ली , चूहा , छिपकली या और कोई दमवी जानवर उसमें मर कर फूल जाये या फट जाये तो कुल पानी निकाला जाये ।
मसला – अगर यह सब बाहर मरे फिर कुएं में गिरे जब भी यही हुक्म है यानी कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - छिपकली या चूहे की दुम कट कर कुएं में गिरी अगरचे फूली , फटी न हो कुल पानी निकाला जाये लेकिन अगर इसकी जड़ में मोम लगा दिया हो बीस डोल निकाला जाये ।
मसला - बिल्ली ने चूहे को पकड़ा और जख्मी कर दिया फिर उससे छुट कर कुएं में गिरा कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - कच्चा बच्चा या जो बच्चा मुर्दा पैदा हुआ कुएं में गिर जाये तो सब पानी निकाला जाये अगरचे गिरने से पहले नहला दिया गया हो ।
मसला - सूअर कुएं में गिरा चाहे ज़िन्दा ही निकल आया कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - सूअर के सिवा कोई और जानवर जिसका जूटा नापाक है ( जैसे शेर , भेड़िया , गीदड़ , कुत्ता ) कुएं में गिरा और उसके बदन पर किसी नजासत का लगा होना यक़ीनी तौर पर मालूम नहीं और उसका मुंह पानी में न पड़ा
तो पानी पाक है इसका इस्तेमाल जाएज़ है । मगर एहतेयातन बीस डोल निकालना बेहतर है ।
मसला – कोई जानवर जिसका थूक नाजिस है ( जैसे कुत्ता , शेर , चीता , गीदड़ , भेड़िया ) अगर कुएं में गिरा और उसका मुंह पानी से लगा तो कुआं नापाक हो गया , कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - गदहा या खच्चर कुएं में गिरा और ज़िन्दा निकल आया तो उसका मुंह अगर पानी में पड़ा तो कुआँ नापाक हो गया । कुल पानी निकाला जाये और अगर मुंह न पड़ा तो बीस डोल पानी निकालें ।
मसला - छुटी हुई मुर्गी कुएं में गिरी और ज़िन्दा निकल आई तो चालीस डोल पानी निकाला जाये ।
मसला - जिन जानवरों का जूठा पाक है जैसे भेड़ , बकरी , गाय , भैंस , हिरन , नीलगाय इन में से कोई कुएं में गिरे और ज़िन्दा निकल आये तो कुआँ पाक है लेकिन बीस डोल पानी निकाला जाये ।
मसला - जिन जानवरों का जूठा मकरुह है ( जैसे छिपकली , बिल्ली , चूहा या सांप ) कुएं में गिरे और ज़िन्दा निकल आये तो बीस डोल पानी निकाला जाये ।
मसला - कोई जानवर छोटा हो या बड़ा अगर कुएं में गिरे और उसके बदन पर नजासत का लगा होना यक़ीनी तौर पर मालूम हो तो कुआं नापाक होजयेगा और कुल पानी निकाला जायेगा जैसे मुर्गी ने पाखाना कुरेदा और फ़ौरन पांव साफ होने से पहले कुएं में गिरी कुआं नजिस हो गया कुल पानी निकाला जाये या जैसे चूहे ने पाखाने के हौज़ में गोता खाया और फ़ौरन कुएं में गिरा कुल पानी निकाला जाये क्योंकि कुआँ नजासत पड़ने से नापाक हुआ न कि चूहे मुर्गी के गिरने से ।
मसला - कुएं में वह जानवर गिरा जिसका जूठा पाक है ( जैसे बकरी वगैरह ) या जूठा भकरुह है ( जैसे मुर्गी , चूहा वगैरह ) और पानी कुछ न निकाला और वज़ू कर लिया तो वज़ू हो जायेगा ।
मसला - जूता या गेंद कुएं में गिरा और नजिस होना यकीनी है तो कुल पानी निकाला जाये वरना बीस डोल , महज़ नजिस होने का ख्याल मोतबर नहीं ।
मसला - मुर्गी का ताजा अन्डा जिस पर अभी तरी बाकी हो पानी में गिर जाये पानी नजिस न होगा जबकि पेट की तरी के अलावा कोई और नजासत न लगने पाये युंही बकरी का बच्चा पैदा होते ही पानी में गिरा और मरा नहीं तो भी पानी नापाक न होगा ।
मसला- उड़ने वाले हलाल जानवर जैसे कबूतर या चिड़िया की बीट या शिकारी परिन्द जैसे चील , शिकरा , बाज़ की बीट कुएं में गिर जाये तो कुआं नापाक न होगा युंही चूहे और चमगादड़ के पेशाब से भी नजिस न होगा ।
मसला- पेशाब की बहुत बारीक बारीक बुन्दकियाँ मिस्ल सूई की नोक के और नजिस गुबार पड़ने से नापाक न होगा ।
मसला- पानी का जानवर जैसे मछली मेढक वगैरह जो पानी में पैदा होता है अगर कुएं में मर जाये या मरा हुआ गिर जाये तो पानी नापाक न होगा चाहे फूल फट भी जाये लेकिन अगर फट कर उसके रेज़े पानी में मिल जायें तो इस पानी का पीना हराम है ।
मसला- खुश्की और पानी के मेंढक का एक हुक्म है यानी इसके मरने बल्कि सड़ने से भी पानी नजिस न होगा लेकिन जंगल का बड़ा मेढक जिसमें बहने के क़ाबिल खुन होता है इसका हुक्म चूहे की मिस्ल है । पानी के मेढक की उंगलीयों के बीच झिल्ली होती है और खुश्की के नहीं ।
मसला- जिसकी पैदाइश पानी की न हो मगर पानी में रहता हो जैसे बत उसके मर जाने से पानी नजिस हो जायेगा ।
मसला- चूहा , छछुन्दर , चिड़िया , छिपकली गिरगिट या उनके बराब या उनसे छोटा कोई जानवर दमवी कूएं में गिरकर मर जाये और अभी फूल या फटा न हो तो बीस डोल से तीस डोल तक निकाला जाये और अगर फूल या फट जाये तो कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - कबूतर या बिल्ली या मुर्गी गिरकर मर जाये और फटे या फूले नहीं तो चालीस डोल से साठ डोल तक पानी निकाला जाये । उनके भी फूलने या फटने में कुल पानी निकाला जायेगा ।
मसला - दो चूहे गिरकर मर जायें और अभी फूले या फटे न हों तो बीस से तीस डोल तक निकाला जाये और तीन या चार या पॉच हों तो चालिस डोल से साठ तक और छः हों तो सब पानी निकाला जाये ।
मसला - दो बिल्लियां गिर कर मर जायें तो कुल पानी निकाला जाये ।
मसला - बे वज़ू और जिस आदमी पर गुस्ल फर्ज़ है अगर बिला ज़रुरत कुएं में उतरे और उनके बदन पर नजासंत न लगी हो तो बीस डोल निकाला जाये और अगर डोल निकालने के लिये उतरा तो कुछ नहीं ।
मसला - कुएं में आदमी गिरा और ज़िन्दा निकल आया और उसके बदन या कपड़े पर कोई नजासत न थी तो कूआं पाक है । बीस डोल पानी निकाल दें ।
मसला - जिन जानवरों में बहता हुआ खून नहीं होता जैसे मच्छर मक्खी वगैरह उनके मरने से पानी नजिस न होगा । फ़ाएदा - मक्खी सालन वगैरह में गिर जाये तो उसे डुबा कर फेंक दें और सालन को काम में लायें ।
मसला - मुरदार की हडडी जिस में गोश्त या चिकनाई लगी हो पानी में गिर जाये तो वह पानी नापाक हो गया कुल निकाला जाये और अगर गोश्त या चिकनाई न लगी हो तो पाक है । मगर सूअर की हडडी से मुतलक़न नापाक हो जायेगा । चाहे गोश्त या चिकनाई लगी हो या न लगी हो ।
मसला - बच्चे ने या काफ़िर ने पानी में हाथ डाल दिया तो का नजिस होना मालूम है जब तो ज़ाहिर है कि पानी नापाक हो गया वरना नजिस तो न हुआ मगर दूसरे पानी से वज़ू करना बेहतर है ।
मसला- मेंगनी और गोबर और लीद अगरचा नापाक हैं मगर इनका क़लील माफ है पानी की नापाकी का हु ना दिया जायेगा ।
मसला - कुल पानी निकालने का यह मतलब है कि इतना पानी निकाल लिया जाये कि अब डोल डालें तो आधा भी न मरे । उसकी मिट्टी निकाल की ज़रुरत नहीं न दीवार धोने की जरुरत कि वह पाक हो गई ।
मसला - यह जो हुक्म दिया गया कि इतना खाना पानी निकाला जा इसका यह मतलब है कि वह चीज जो कुएं में गिरी पहले उसको निकाल लें फिर इतना पानी निकालें अगर वह चीज उसी में पड़ी रही तो बिना ही पानी निकालें बेकार हैं ।
मसला - जिस कुएं का डोल मुकर्रर है डोल की गिनती उसी डील से की जाये चाहे छोटा हो या बड़ा और अगर इस कुएं का कोई खास डोल मुक़र्रर नहीं है तो इतना बड़ा डोल हो कि जिसमें एक सा पानी आ जाये ।
मसला - डोल भरा हुआ निकलना जरूरी नहीं अगर कुछ पानी छलक कर गिर गया या टपक गया मगर जितना बचा वह आधे से ज्यादा है तो वह पूरा ही डोल गिनां जायेगा ।
मसला - छोटे बड़े मुख्तलिफ़ डोलों से पानी निकाला तो हिसाब करके एक सा फी डोल या मुकर्रर डोल के बराबर कर लें ।
मसला - जिस कुएं का पानी नापाक हो गया उसमें से जितना पानी निकालने का हुक्म है उतना निकाल लिया गया तो अब वह रस्सी डोल जिसमें पानी निकाला है वह पाक हो गया धोने की जरुरत नहीं ।
मसला - जो कूआं ऐसा है कि उसका पानी टूटता ही नहीं चाहे कितना ह्री निकालें अगर उसमें नजासत पड़ गई या उसमें कोई ऐसा जानवर मर गया जिसमें कुल पानी निकालने का हुक्म है तो ऐसी हालत में हुक्म यह है कि पहले यह मालूम कर लें कि कितना पानी है । जितना हो सब निकाल दिया जाये निकालते वक़्त जितना ज़्यादा होता गया उसका कुछ ऐतबार नहीं । मसलन यह मालूम कर लिया कि हज़ार डोल है तो हज़ार डोल निकाल दें कुआँ पाक हो जायेगा और यह मालूम करना कि इस वक्त कितना पानी है
उसका तरीक़ा यह कि दो मुसलमान परहेज़गार जिनको यह महारत हो कि बता सकें कि इस कुएं में इतना पानी है वह जितने डोल बतायें उतना ही निकाल दें कूआँ पाक हो जायेगा एक तरीक्वा यह भी है कि पानी की गहराई किसी लकड़ी या रस्सी से नाप लें और फिर चन्द आदमी बहुत फुर्ती से सौ डोल निकाल लें फिर नापें जितना कम हो जाये उसी हिसाब से पानी निकाल लें जैसे पहली मर्तबा नापने से मालूम हुआ कि दस हाथ पानी है । फिर सौ डोल निकालने के बाद नापा तो नौ हाथ रह गया तो मालूम हुआ कि दस सौ यानी हज़ार डोल निकाल दें तो दस हाथ पानी निकल जायेगा और कूऑ पाक हो जायेगा।
मसला - कूएं से मरा हुआ जानवर निकाला तो अगर उसके गिरने का वक़्त मालूम है तो उसी वक़्त से पानी नजिस है । इसके बाद अगर किसी ने उससे वज़ू या गुस्ल किया तो न वज़ू हुआ न गुस्ल । उस वज़ू और गुस्ल से जितनी नमाज़ें पढ़ीं वह सब न हुईं उन्हें फिर पढ़े यूहीं उस पानी से कपड़े धोये या किसी और तरह से बदन पर या कपड़े पर लगा तो कपड़े और बदन का पाक करना ज़रुरी है और उनसे जो नमाज़ें पढ़ीं उनका फिर से पढ़ना फ़र्ज़ है और अगर गिरने का वक़्त मालूम नहीं तो जिस वक़्त से देखा गया उस वक़्त से नजिस ठहरेगा अगरचा फूला फटा हो उससे पहले पानी नजिस नहीं और पहले जो वज़ू या गुसल किया या कपड़े धोये कुछ हर्ज नहीं आसानी के लिये इसी पर अमल है ।

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